खुशी,दो अक्षर का शब्द ,लेकिन बहुत बड़ी। सोचिए तो परमात्मा को पाने का मार्ग ,नही तो केवल भ्रम।
खुशी में खु का मतलब खुद और शी का मतलब शीशा ,मतलब खुद को शीशे में देखना ,अपने आप में परमात्मा को देखना।
किसी के लिए खुशी का मतलब पैसा ,किसी के लिए नाम ,सम्मान ,किसी के लिए रिश्ते ,किसी के लिए ईश्वर ,अलग अलग रूपो में अलग अलग मायने ,लेकिन सब चाहते तो खुशी ही है,लेकिन मिलेगा कैसे ,अधिकतर लोग केवल सोचते ही रहते है।
लेकिन आज कल का परिवेश ,रहन सहन हमे खुश रहने नही देता । हम अपने ही भाग दौड़ भरे जिंदगी में इतने व्यस्त है कि हम खुद सोच ही नही पाते कि क्या जिंदगी में खुशी नाम की कोई चीज है या बस यूं ही जिंदगी है।
लेकिन बहुत सारे लोग ये जरूर पुछगे की कर्तव्यों का निर्वहन करते करते खुश कैसे रहे । लेकिन यही बोलना चाहूंगा कि कोशिश तो कीजिये खुश रहने का ,बूंद बूंद कर कर ही तो घड़ा भरता है ।
धन्यवाद।
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